सत्य की खोज में, वंश-हीन हो चलो।
सत्य मे प्रमत्त तम, एकचित्त, लवलीन हो चलो।
सत्य का अभिमान तुम, ललाट पर पोत लो।
सत्य के घाम से, संघर्ष वक्ष सींच लो।
सत्य के अतिरिक्त, विकल्प ना शेष हो।
सत्य श्वेत सुस्पष्ट, ना स्वरूप, ना भेष हो।
सत्य हर श्वास मे, सत्य हर कण मे हो।
सत्य हर काल मे, सत्य हर क्षण मे हो।
-दीप
